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देश छोड़कर भागे राष्ट्रपति, श्रीलंका में फिर से लगी इमरजेंसी

By: Jyoti Singh Jenny
18 Jul 2022 11:12:38 AM Kurukshetra University, Haryana

12 जुलाई की रात को ही राष्ट्रपति राजपक्षे श्रीलंका छोड़ के मालदीव भाग गए. संसद के स्पीकर ने रनिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया और विक्रमसिंघे ने प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को भांपते हुए श्रीलंका में तीसरी इमरजेंसी लगाने का ऐलान किया. पिछले तीन दिन से प्रदर्शनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री के कार्यालय तक घुस चुके हैं. प्रदर्शनकारी ऑफिस में घुस के नारेबाज़ी कर रहे हैं और राष्ट्रपति गोटबाया और रनिल विक्रमसिंघे से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

 

पहली इमरजेंसी 1अप्रैल 2022, को बिजली की कटौती और महंगाई के कारण प्रदर्शन को दबाने के लिए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे द्वारा लगाई गई थी. उसके बाद 6 मई 2022, इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक होने से राष्ट्रपति को इमरजेंसी का ऐलान करना पड़ा था. जिसके बाद 22 मई को इमरजेंसी हटा दी गई थी.

 

श्रीलंका की जनता बहुत उग्र हो गई है और सरकारी मीडिया तंत्रों पर कब्ज़ा कर लिया है. समाचार प्रसारण रोक दिया गया है. उनको रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले चलाए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर आज शाम तक राष्ट्रपति और पीएम का इस्तीफा नहीं मिला तो संसद की सारी इमारतों पर कब्ज़ा कर लेंगे.

 

श्रीलंका ने अमेरिकी दूतावास की सभी सेवाओं को रद्द कर दिया है. इस आर्थिक दुर्व्यवस्था के लिए राष्ट्रपति को दोषी ठहराया गया है. जिसकी वजह से देश में महीनों से खाद्य पदार्थों, ईंधन और दवाओं की कमी हो रही है.

 

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय राजदूत गोपाल बागले ने रविवार को कोलंबो में श्रीलंका कृषि मंत्री महिंदा अमारावीरा से मिलकर उन्हें भारत की ओर से 44 हज़ार टन यूरिया वहां भेजे जाने की जानकारी दी.

 

'ग्लोबल टाईम्स' में छपे लेख के अनुसार श्रीलंका के कुल कर्ज़ में से 47 फ़ीसदी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का 13 फ़ीसदी एशियन डेवलपमेंट बैंक और चीन और जापान का 10-10 फ़ीसदी हैं. कर्ज़ में डूबने की वजह से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. सम्पूर्ण देश में चाल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच श्रीलंका को भारी आर्थिक नुकसान का खामियाजा भुगतना पड़ेगा. आने वाला समय इस देश के लिए बड़ा कठिन होने वाला है.

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